प्रमुख बिंदु

  • सरकार ने 29 श्रम कानूनों को चार व्यापक श्रम संहिताओं में समेकित किया है।
  •  चार श्रम संहिताओं में मज़दूरी संहिता, 2019, औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें संहिता, 2020 शामिल हैं।
  • यह ऐतिहासिक सुधार अनुपालन को सुव्यवस्थित करता है, अप्रचलित प्रावधानों का आधुनिकीकरण करता है, और एक सरल, कुशल ढाँचा बनाता है जो व्यवसाय करने में आसानी को बढ़ावा देता है, साथ ही श्रमिकों के अधिकारों और कल्याण की सुरक्षा भी करता है।

भारत के विकास की आधारशिला श्रम

श्रम का सशक्तिकरण एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला है। इस दृष्टिकोण को दर्शाते हुए, भारत में रोज़गार ने उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई है – 2017-18 में 47.5 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 64.33 करोड़ हो गया, जो महज़ छह वर्षों में 16.83 करोड़ नौकरियों की शुद्ध वृद्धि है। इसी अवधि के दौरान, बेरोज़गारी दर 6.0% से तेज़ी से घटकर 3.2%  हो गई, और 1.56 करोड़ महिलाएँ औपचारिक कार्यबल में शामिल हुईं, जो समावेशी और निरंतर श्रम सशक्तिकरण पर सरकार के ज़ोर को रेखांकित करता है। श्रम बाज़ार के सकारात्मक दृष्टिकोण से एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन भी हुआ है, जो अंतर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा से नीचे के लोगों के अनुपात में गिरावट से परिलक्षित होता है। इसके अतिरिक्त, भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली का तेजी से विस्तार हुआ है और यह विश्व स्तर पर सबसे बड़ी प्रणालियों में से एक बन गई है।

श्रम, आर्थिक वृद्धि और विकास का एक प्रमुख चालक है। श्रमिकों के अधिकारों को नियंत्रित करने वाले ढाँचे को सरल बनाने और मज़बूत करने के लिए, सरकार ने 29 श्रम कानूनों को चार व्यापक श्रम संहिताओं में समेकित किया है— अर्थात्, मज़दूरी संहिता, 2019,  औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें संहिता, 2020।

यह ऐतिहासिक सुधार सुनिश्चित करता है कि श्रमिकों को सुरक्षा, गरिमा, स्वास्थ्य और कल्याणकारी उपायों तक आसान पहुँच प्राप्त हो, जिससे एक निष्पक्ष और भविष्य के लिए तैयार श्रम पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता मज़बूत होती है।

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