
टीम अनंत सोच
धनबाद: प्रशासन की ओर से साउंड सिस्टम और डीजे संचालन को लेकर जारी दिशा-निर्देशों के खिलाफ धनबाद जिला विद्युत साउंड एवं डीजे डेकोरेटर्स संघ ने नाराजगी जताई है। संघ ने कहा कि नियमों के उल्लंघन के लिए सीधे साउंड ऑपरेटरों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। यदि किसी आयोजन समिति या अन्य व्यक्ति की गलती के लिए निर्दोष संचालकों पर कार्रवाई की गई, तो पूरे धनबाद जिले में साउंड सिस्टम का संचालन बंद कर दिया जाएगा।
इस संबंध में संघ की ओर से हीरापुर स्थित अग्रसेन भवन, दुर्गा मंदिर तेलीपाड़ा में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इसमें संघ के महासचिव एवं अन्य सदस्यों ने प्रशासन के हालिया निर्देशों पर अपनी आपत्तियां रखते हुए कहा कि अचानक नियम लागू होने से साउंड संचालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। संचालक मुकदमे और कानूनी कार्रवाई के डर से बुकिंग लेने में भी हिचक रहे हैं।
संघ के सदस्यों ने कहा कि प्रशासन की ओर से दिशा-निर्देश अक्सर उस समय जारी किए जाते हैं, जब पूजा समितियां और अन्य आयोजनकर्ता पहले ही साउंड सिस्टम की बुकिंग करा चुके होते हैं। इससे संचालकों और आयोजन समितियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा होती है। संघ ने मांग की कि नियमों की जानकारी समय रहते दी जाए, ताकि सभी पक्ष उनका पालन कर सकें।
डीजे और साधारण साउंड सिस्टम में अंतर स्पष्ट करने की मांग
संघ ने दुर्गा पूजा के दौरान इस्तेमाल होने वाले साउंड सिस्टम और डीजे को एक ही श्रेणी में रखने पर भी आपत्ति जताई। सदस्यों के अनुसार, दुर्गा पूजा में आमतौर पर जॉकी द्वारा संचालित डीजे के बजाय साधारण साउंड बॉक्स का उपयोग किया जाता है। ऐसे में दोनों के बीच अंतर को समझते हुए नियम लागू किए जाने चाहिए। संघ ने यह सवाल भी उठाया कि अन्य आयोजनों और रैलियों में इसी तरह की पाबंदियां नहीं दिखतीं, जबकि साउंड व्यवसाय से जुड़े लोगों पर कार्रवाई की आशंका बनी रहती है।
कतरास की घटना का हवाला देकर जताया विरोध
प्रेस वार्ता में पिछले वर्ष कतरास में हुई एक घटना का भी उल्लेख किया गया। संघ के अनुसार, एक आयोजन के दौरान समिति के सदस्यों के बीच विवाद के बाद पुलिस ने रात करीब दो बजे साउंड ऑपरेटर के घर से साउंड सिस्टम जब्त कर लिया था। संघ का कहना है कि साउंड सिस्टम की बुकिंग और उपलब्धता संचालक की जिम्मेदारी होती है, लेकिन आयोजन के दौरान उसका संचालन कई बार कमेटी या बारातियों द्वारा किया जाता है। ऐसी स्थिति में बिना गलती के ऑपरेटर के खिलाफ कार्रवाई करना अनुचित है।
संघ ने स्पष्ट किया कि जिस व्यक्ति की गलती हो, कार्रवाई भी उसी के खिलाफ होनी चाहिए। किसी दूसरे व्यक्ति के कृत्य के लिए साउंड संचालकों को दंडित नहीं किया जाना चाहिए।
65 डेसिबल की सीमा पर व्यवहारिक दिशा-निर्देश की मांग
ध्वनि की अधिकतम 65 डेसिबल सीमा को लेकर भी संघ ने सवाल उठाए। सदस्यों का कहना है कि इस सीमा को लेकर व्यावहारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने प्रशासन से ध्वनि स्तर की निगरानी, मापने के तरीके और नियमों के पालन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की, ताकि संचालक निर्धारित नियमों के अनुरूप काम कर सकें।
संघ ने कहा कि वह प्रशासन और कानून के साथ है तथा नियमों का पालन करने के लिए तैयार है। हालांकि, किसी आयोजन समिति या समाज के अन्य लोगों की गलती का खामियाजा निर्दोष साउंड ऑपरेटरों और संघ के सदस्यों को भुगतना पड़ा, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसी स्थिति में पूरे धनबाद जिले में साउंड सिस्टम का संचालन तत्काल बंद कर दिया जाएगा।
प्रेस वार्ता में धनबाद जिला विद्युत साउंड एवं डीजे डेकोरेटर्स संघ के महासचिव समेत कई पदाधिकारी, सदस्य और साउंड ऑपरेटर उपस्थित थे।

