सिविल सर्जन डॉ. संजीव कुमार प्रसाद की अध्यक्षता में आयोजित हुआ जागरूकता कार्यक्रम, निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण और टीबी मरीजों के नियमित फॉलोअप का दिया गया निर्देश

टीम अनंत सोच
धनबाद: राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत मंगलवार को धनबाद के MTC सभागार में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) के लिए टीबी (क्षय रोग) से संबंधित प्रशिक्षण, उन्मुखीकरण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। सिविल सर्जन डॉ. संजीव कुमार प्रसाद की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के सभी CHO, STLS एवं राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े कर्मियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक स्तर पर टीबी मरीजों की शीघ्र पहचान, नियमित स्क्रीनिंग, समय पर जांच एवं उपचार सुनिश्चित करने के साथ निक्षय पोर्टल पर मरीजों का पंजीकरण और टीबी उन्मूलन अभियान में CHO की भूमिका को मजबूत करना था।
इस दौरान जिला यक्ष्मा पदाधिकारी (DTO) डॉ. रेखा कुमारी ने टीबी के संक्रमण, इसके लक्षण, जांच और उपचार से संबंधित विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि टीबी एक संक्रामक लेकिन पूरी तरह उपचार योग्य बीमारी है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, हालांकि शरीर के अन्य अंगों को भी अपनी चपेट में ले सकती है।
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी रहना, बलगम में खून आना, लगातार बुखार, रात में पसीना आना, वजन घटना, भूख कम लगना और कमजोरी टीबी के प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल जांच कराने की सलाह दी गई। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि टीबी संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने और बोलने से हवा के माध्यम से फैलती है, जबकि हाथ मिलाने या साथ भोजन करने से नहीं फैलती।
बैठक में हाई रिस्क आबादी की पहचान पर विशेष जोर दिया गया। इसमें टीबी मरीजों के परिवार के सदस्य, एचआईवी संक्रमित व्यक्ति, मधुमेह से पीड़ित, कुपोषित, धूम्रपान एवं तंबाकू का सेवन करने वाले तथा कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों की नियमित स्क्रीनिंग करने का निर्देश दिया गया।
संभावित मरीजों की जांच के लिए चेस्ट एक्स-रे, बलगम जांच तथा जरूरत के अनुसार CBNAAT और Truenat जैसी NAAT जांच कराने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। टीबी की पुष्टि होने पर मरीज का निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण, उपचार शुरू कराने और नियमित फॉलोअप सुनिश्चित करने को कहा गया।
प्रशिक्षण में टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (TPT) पर भी विशेष चर्चा हुई। CHO को निर्देश दिया गया कि टीबी मरीजों के परिवार और निकट संपर्क में रहने वाले लोगों की स्क्रीनिंग कराएं। सक्रिय टीबी को निर्धारित प्रक्रिया से बाहर करने के बाद पात्र व्यक्तियों को टीपीटी से जोड़ें तथा उपचार पूरा होने तक उनका फॉलोअप करें।
इसके अलावा टीबी मरीजों को नियमित रूप से दवा लेने, बिना चिकित्सकीय सलाह के उपचार बीच में नहीं छोड़ने और पौष्टिक आहार लेने के लिए प्रेरित करने को कहा गया। मरीजों को उपलब्ध सरकारी सुविधाओं एवं पोषण सहायता की जानकारी देने पर भी बल दिया गया।
सिविल सर्जन डॉ. संजीव कुमार प्रसाद ने सभी CHO को अपने-अपने आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM) केंद्रों पर नियमित टीबी स्क्रीनिंग, संभावित मरीजों की पहचान, समय पर जांच एवं रेफरल, निक्षय आईडी निर्माण, पोर्टल पर डेटा एंट्री और मरीजों के परिवार की कांटैक्ट ट्रेसिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने टीबी मुक्त भारत ऐप के डाउनलोड एवं पंजीकरण के लिए भी लोगों को जागरूक करने को कहा।
कार्यक्रम में जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. रेखा कुमारी, STS सह DPC प्रभारी कौशलेन्द्र कुमार सिंह, जिला PPM कोऑर्डिनेटर मो. मजहर अंसारी, DEO राजेश कुमार सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, STLS एवं अन्य संबंधित NTEP कर्मी उपस्थित थे।
अंत में सिविल सर्जन ने सभी स्वास्थ्यकर्मियों से आपसी समन्वय के साथ टीबी उन्मूलन अभियान को प्रभावी बनाने और सामुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की अपील की। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

