टीम अनंत सोच 

धनबाद : बैंक मोड़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष प्रमोद गोयल आमजन की समस्याओं को अपनी लेखनी से जनप्रतिनिधियों सहित प्रशासन एवं संबंधित विभाग एवं सरकार को लगातार रूबरू कराते हैं। आज उन्होंने धनबाद की लचर बिजली व्यवस्था पर रखी है। उनकी बातों को अनंत सोच टीम ने भी जगह दी है।

देश को कोयला देने वाला,

उद्योगों को ऊर्जा देने वाला,

खनिज संपदा से समृद्ध

हमारा ✦ धनबाद ✦

आज खुद बिजली संकट से कराह रहा है।

यह वही शहर है जो पूरे देश को रोशन करता है,

लेकिन विडंबना देखिए —

अपने ही घरों, दफ्तरों और संस्थानों में

अंधेरे से जूझ रहा है।

⚡ बिजली रानी अब सुविधा नहीं,

बल्कि “कभी-कभार आने वाली मेहमान” बन चुकी है।

अब हालात ये हैं कि —

🏦 बैंक हो या हॉस्पिटल

🏢 सीओ ऑफिस हो या बीडीओ कार्यालय

📮 पोस्ट ऑफिस हो या रजिस्ट्री ऑफिस

🏫 स्कूल हो या कॉलेज

🏛 केंद्रीय कार्यालय हो या सरकारी दफ्तर

हर जगह

🔋 जनरेटर और इन्वर्टर ही असली ऊर्जा स्रोत बन चुके हैं,

और बिजली केवल “एक्स्ट्रा सपोर्ट” बनकर रह गई है।

यह त्रासदी अब सिर्फ आम जनता तक सीमित नहीं रही —

📰 प्रिंट मीडिया

📱 सोशल मीडिया

🏭 व्यापार और उद्योग

सब इसकी मार झेल रहे हैं।

❓ ऐसे में सवाल उठता है —

क्या इसी अंधेरे में

धनबाद का विकास होगा?

जब मूलभूत सुविधाएं ही चरमराई हों,

तो विकास के परिणाम की उम्मीद आखिर कैसे की जाए?

क्या धनबाद सिर्फ —

💰 राजस्व देने के लिए है?

🪨 खनिज लुटाने के लिए है?

🙏 त्याग और बलिदान करने के लिए है?

और हमारे

👔 जनप्रतिनिधि

🏢 संस्थाएं

🤝 एनजीओ

🖋 ब्यूरोक्रेसी

🏛 राज्य सरकार

🇮🇳 केंद्र सरकार

क्या केवल भाषण, उद्घाटन और अखबारों की सुर्खियों तक सीमित रह गए हैं?

⚠️ जिम्मेदारी और कर्तव्यपरायणता

क्या अब सिर्फ शब्द बनकर रह गए हैं?

धनबाद आज त्राहिमाम कर रहा है।

टैक्स देने वाला शहर

आज बुनियादी बिजली के लिए तरस रहा है।

🙏 धनबाद को बचाइए…

इसे जीरो कट बिजली दीजिए।

क्योंकि —

🖤

जनता का टैक्स, जनता पर भार,

कितना बेबस, कितना लाचार धनबाद! 🥲

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *