
टीम अनंत सोच
धनबाद: नगर निगम चुनाव के महज चार महीने बाद ही निर्वाचित वार्ड पार्षदों और निगम प्रशासन के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। बुधवार को बेकारबांध में आयोजित बैठक में 36 वार्ड पार्षद शामिल हुए, जहां निगम की कार्यप्रणाली, विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर गंभीर चर्चा की गई।
बैठक में पार्षदों ने आरोप लगाया कि उन्हें विकास कार्यों में अपेक्षित अधिकार नहीं दिए जा रहे हैं और निगम बोर्ड की बैठकों में पारित प्रस्तावों को भी धरातल पर लागू नहीं किया जा रहा है। उनका कहना था कि इससे न केवल विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि जनता के बीच उनकी जवाबदेही भी कठिन होती जा रही है।
वार्ड संख्या 20 के पार्षद एवं स्थायी समिति सदस्य अशोक पाल ने कहा कि निगम बोर्ड से पारित सभी प्रस्तावों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र निर्धारित अवधि में जारी करने तथा उनमें होने वाली त्रुटियों के त्वरित सुधार की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि बोर्ड में प्रत्येक वार्ड को 15 सफाईकर्मी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव पारित हुआ था, लेकिन इसके विपरीत सफाईकर्मियों की संख्या घटाई जा रही है, जिससे सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
बैठक में मौजूद अन्य पार्षदों ने भी सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को उठाया। उनका आरोप था कि निगम अधिकारियों को बार-बार अवगत कराने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है।
वार्ड संख्या 35 की पार्षद एवं स्थायी समिति सदस्य सोनाली कुमारी ने कहा कि विकास कार्यों से संबंधित कई प्रस्ताव केवल कागजों तक सीमित रह जाते हैं। इससे जनता के बीच जनप्रतिनिधियों की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है और लोगों का भरोसा कमजोर पड़ रहा है।
बैठक के अंत में सभी पार्षदों ने एकजुटता दिखाते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। चुनाव के कुछ ही महीनों बाद निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ती खाई अब शहर के विकास कार्यों और प्रशासनिक समन्वय को लेकर नए सवाल खड़े कर रही है।

