टीम अनंत सोच 

धनबाद: छाताबाद भू-धंसान मामले को लेकर बीसीसीएल, जेआरडीए और प्रभावित परिवारों के बीच लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध खत्म होने की दिशा में बढ़ गया है। राज्य के जल संसाधन एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन की अध्यक्षता में धनबाद सर्किट हाउस में करीब चार घंटे तक चली बैठक में प्रभावितों की मांगों और पुनर्वास को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी। बैठक में टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो भी मौजूद रहे।

बैठक में तय किया गया कि भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र का आईआईटी-आईएसएम धनबाद से सर्वे कराया जाएगा। एक महीने के भीतर सर्वे पूरा कर डेंजर जोन का सीमांकन किया जाएगा। सर्वे के दायरे में मस्जिद, मदरसा, ईदगाह और स्कूल समेत अन्य संवेदनशील स्थलों को भी शामिल किया जाएगा।

प्रभावित परिवारों ने बेलगढ़िया जाने से इनकार किया है। इसके बाद उनके पुनर्वास के लिए तेतुलमारी टाउनशिप में कमरों की व्यवस्था करने का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं, रैयती जमीन के मुआवजे को लेकर कानूनी प्रक्रिया के तहत 1400 वर्गफीट के निर्धारित रेट के आधार पर चार गुना मुआवजा देने पर विचार किया जाएगा।

बैठक में भू-धंसान की घटना में घायल लोगों को चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने पर भी सहमति बनी। खनन कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने, घटनास्थल पर बैरिकेडिंग और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करने तथा इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम तैयार करने के निर्देश दिए गए।

डेंजर जोन को चिन्हित करने के बाद वहां बालू भराई कर जमीन के निचले हिस्से को पैक करने की योजना पर भी चर्चा हुई, ताकि आगे भू-धंसान के खतरे को कम किया जा सके।

मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि वे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रतिनिधि के तौर पर छाताबाद पहुंचे थे। बैठक में बनी सहमति और कार्यवृत्त को मुख्यमंत्री की स्वीकृति के लिए तत्काल भेजा जाएगा, जिससे राहत, पुनर्वास और मुआवजे से संबंधित प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।

हालांकि, आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि बैठक में हुई सहमति के बावजूद आशियाना आंदोलन को तत्काल पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीसीसीएल अधिकारियों के साथ आगे की बातचीत और प्रभावित स्थल के निरीक्षण के बाद ही आंदोलन समाप्त करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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