टीम अनंत सोच 

धनबाद: झारखंड की लोक संस्कृति और भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक करमा पर्व धनबाद में पारंपरिक उल्लास और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। पर्व के समापन पर पुलिस लाइन की महिलाओं और युवतियों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद करम डाल और जावा डाली का कार्मिक नगर स्थित तोहार खुली बांध में विसर्जन किया।

करमा पर्व को लेकर महिलाओं और युवतियों में खासा उत्साह देखने को मिला। पर्व के दौरान बहनों ने अपने भाइयों की दीर्घायु, सुख-समृद्धि, शांति और उन्नति की कामना करते हुए उपवास रखा। रात में करम डाल की स्थापना कर पूजा की गई। इसके बाद महिलाओं और युवतियों ने करम डाल के चारों ओर पारंपरिक गीत गाते हुए नृत्य किया और रातभर जागरण किया।

पुलिस लाइन प्रेमचंद नगर की मन्नू कुमारी ने बताया कि करमा झारखंड की समृद्ध लोकपरंपरा और आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। इसमें भाई-बहन के प्रेम और पारिवारिक रिश्तों की गहरी भावना दिखाई देती है। पूजा के बाद बहनें भाइयों की मंगलकामना करती हैं और रक्षा सूत्र बांधने के बाद अपना उपवास समाप्त करती हैं।

वहीं सुनीता कुमारी ने बताया कि करमा पूजा के अगले दिन करम डाल और जावा डाली के विसर्जन की परंपरा है। विसर्जन की रस्म पूरी होने के बाद ही करमा पर्व का अनुष्ठान विधिवत संपन्न माना जाता है।

कार्मिक नगर के लोहार कुल्ही क्षेत्र में भी पर्व को लेकर उत्साह चरम पर रहा। बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां करम डाल व जावा डाली लेकर डीजे की धुन पर नाचते-गाते हुए विसर्जन स्थल की ओर रवाना हुईं। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने गीत-संगीत और नृत्य के बीच करमा पर्व की खुशियां साझा कीं।

श्रद्धालुओं ने बताया कि विसर्जन के बाद घर लौटकर ही वे पानी ग्रहण कर अपना उपवास तोड़ेंगी। पूरे आयोजन के दौरान महिलाओं और युवतियों का उत्साह देखते ही बना। सफेद और लाल रंग की पारंपरिक पोशाक में सजी महिलाओं ने झारखंड की जीवंत लोकसंस्कृति, प्रकृति के प्रति आस्था और भाई-बहन के स्नेह की खूबसूरत झलक पेश की।

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