
टीम अनंत सोच
धनबाद: धनबाद पुलिस की अनोखी पहल ने एक बार फिर जनता का भरोसा मजबूत किया है। वर्षों पहले खोए और चोरी हुए मोबाइल फोन जब उनके असली मालिकों को वापस मिले, तो लोगों की खुशी देखने लायक थी। कई लोग अपने मोबाइल मिलने की उम्मीद छोड़ चुके थे, लेकिन तकनीक और पुलिस की सक्रियता ने उनकी उम्मीदों को फिर से जगा दिया। “अमानत कार्यक्रम” के तहत 505 मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को सौंपे गए।
धनबाद पुलिस लाइन के नवनिर्मित सभागार में आयोजित “अमानत कार्यक्रम” में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग अपने मोबाइल लेने पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान धनबाद पुलिस ने 505 खोए और चोरी हुए मोबाइल उनके असली मालिकों को सौंपे। इनमें ऐसे भी कई लोग शामिल थे, जिन्होंने वर्षों पहले अपना मोबाइल खो दिया था और अब उसके मिलने की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी। जैसे ही उन्हें उनका मोबाइल मिला, उनके चेहरों पर खुशी साफ दिखाई देने लगी।
कार्यक्रम में उपायुक्त आदित्य रंजन, एसएसपी प्रभात कुमार, ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब और डीएफओ समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
अधिकारियों ने लोगों को बताया कि आज के समय में मोबाइल केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की डिजिटल पहचान बन चुका है। बैंकिंग, आधार, पैन, सरकारी योजनाएं, ऑनलाइन भुगतान, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी अधिकांश सेवाएं अब मोबाइल से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में मोबाइल गुम होने या चोरी होने पर बिना देर किए CEIR पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराना बेहद जरूरी है।
अधिकारियों ने बताया कि CEIR पोर्टल पर शिकायत दर्ज होते ही संबंधित मोबाइल ब्लॉक कर दिया जाता है, जिससे उसका कोई भी व्यक्ति उपयोग नहीं कर सकता। साथ ही पुलिस तकनीकी सहायता से मोबाइल की लोकेशन ट्रेस कर उसे बरामद करने का प्रयास करती है। यही वजह है कि इस अभियान के माध्यम से सैकड़ों मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों तक वापस पहुंच सके।
कार्यक्रम के दौरान लोगों को साइबर अपराधों से बचाव के प्रति भी जागरूक किया गया। अधिकारियों ने अपील की कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और संदिग्ध कॉल या संदेशों से सतर्क रहें। साथ ही CEIR पोर्टल की जानकारी अपने परिवार, मित्रों और परिचितों तक भी पहुंचाने का आग्रह किया गया। मोबाइल की वापसी से लोगों के चेहरों पर लौटी मुस्कान इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक तकनीक और पुलिस की प्रतिबद्धता मिलकर वर्षों पुरानी उम्मीदों को भी साकार कर सकती है। “अमानत कार्यक्रम” सिर्फ मोबाइल लौटाने का अभियान नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और पुलिस की जवाबदेही का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।

