
टीम अनंत सोच
धनबाद: धनबाद के कतरास थाना क्षेत्र स्थित गोविंदपुर सिलेक्ट में मंगलवार शाम हुई भीषण भू-धंसान की घटना ने एक बार फिर कोयलांचल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अचानक हुई इस घटना में आधा दर्जन से अधिक घर धरती में समा गए। गनीमत रही कि लोग समय रहते घरों से बाहर निकल गए, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। घटना के 12 घंटे बाद तक भी बीसीसीएल की ओर से राहत एवं बचाव कार्य शुरू नहीं किए जाने से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। प्रभावित परिवारों ने तत्काल पुनर्वास और स्थायी आवास की मांग की है।
मंगलवार शाम करीब 7 बजे गोविंदपुर सिलेक्ट बस्ती में अचानक तेज आवाज के साथ धरती कांपने लगी। कंपन महसूस होते ही लोग घबराकर अपने-अपने घरों से बाहर भागे। देखते ही देखते छह मकान भू-धंसान की चपेट में आकर पूरी तरह जमींदोज हो गए। घरों में रखा घरेलू सामान भी मलबे और जमीन के भीतर दब गया। रात का अंधेरा होने के कारण नुकसान का सही आकलन नहीं हो सका।
बुधवार सुबह जब हालात स्पष्ट हुए तो प्रभावित परिवार अपने टूटे हुए घरों के मलबे से सामान निकालने की कोशिश करते दिखाई दिए। लोगों का कहना है कि वर्षों की मेहनत से बनाया गया उनका आशियाना कुछ ही क्षणों में मिट्टी में समा गया। कई परिवार अब खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
घटना की सूचना मिलने पर रात में वार्ड संख्या-1 की पार्षद डॉ. मधुबाला और कतरास पुलिस मौके पर पहुंची तथा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटना के करीब 12 घंटे बीत जाने के बाद भी बीसीसीएल का कोई अधिकारी या राहत दल मौके पर नहीं पहुंचा। इससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई।
भू-धंसान से प्रभावित परिवारों की मांग है कि उन्हें तत्काल सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित किया जाए और स्थायी आवास उपलब्ध कराया जाए। लोगों का कहना है कि इस इलाके में पहले भी भू-धंसान की घटनाएं होती रही हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कोयलांचल क्षेत्र में भू-धंसान की घटनाएं नई नहीं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने समय में किए गए भूमिगत कोयला खनन के बाद कई खदानों को वैज्ञानिक तरीके से बालू या पानी से नहीं भरा गया। यही वजह है कि समय-समय पर जमीन धंसने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य में इससे भी बड़ा हादसा हो सकता है।

