बारिश की संभावना के बीच दुहाटांड़ की कुम्हार पट्टी में मिट्टी के दीये, खिलौने और मूर्तियों को सुखाने-पैक करने की तेज हुई तैयारी

टीम अनंत सोच
धनबाद: दिवाली का त्योहार नजदीक है और इसी के साथ कुम्हार परिवारों की रोजी-रोटी का सबसे अहम समय भी शुरू हो गया है। लेकिन चक्रवात ‘अरनब’ को लेकर मौसम संबंधी चेतावनी और अगले दो-तीन दिनों में बारिश की संभावना ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। संभावित बारिश से तैयार माल को बचाने के लिए धनबाद के दुहाटांड़ स्थित कुम्हार पट्टी में परिवार के सदस्य दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
बुधवार सुबह निकली धूप का लाभ उठाते हुए कुम्हार परिवार मिट्टी से बने दीये, खिलौने, छोटी-छोटी मूर्तियां और सजावटी सामान खुले स्थानों पर सुखाते नजर आए। वहीं, जो सामान पहले से सूख चुका है, उसे बारिश से बचाने के लिए पैक कर सुरक्षित स्थानों पर रखा जा रहा है। कुम्हारों की कोशिश है कि मौसम बिगड़ने से पहले अधिक से अधिक तैयार उत्पादों को सुरक्षित कर लिया जाए।
स्थानीय कुम्हार राजेंद्र पंडित ने बताया कि मिट्टी से बने सामान को अच्छी तरह सुखाना बेहद जरूरी है। यदि तैयार सामान बारिश में भीग गया, तो उसके खराब होने का खतरा रहता है। इससे कई दिनों की मेहनत बेकार होने के साथ आर्थिक नुकसान भी हो सकता है। उन्होंने बताया कि मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए तैयार दीयों, खिलौनों और अन्य उत्पादों को सुखाकर पैक करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
दरअसल, दिवाली कुम्हार परिवारों के लिए साल के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी अवसरों में से एक है। इस दौरान मिट्टी के दीयों, खिलौनों और छोटी मूर्तियों की मांग बढ़ जाती है। इन उत्पादों की बिक्री से ही परिवारों की आजीविका चलती है। ऐसे में त्योहार से ठीक पहले बारिश होने पर न केवल तैयार माल को नुकसान पहुंच सकता है, बल्कि बाजार में बिक्री भी प्रभावित होने की आशंका है।
फिलहाल दुहाटांड़ की कुम्हार पट्टी में मौसम साफ रहने के दौरान काम तेजी से निपटाने की कोशिश जारी है। कुम्हार परिवारों को उम्मीद है कि उनका तैयार सामान सुरक्षित रहेगा और दिवाली के बाजार में कारोबार प्रभावित नहीं होगा। हालांकि, मौसम की अनिश्चितता ने पारंपरिक मिट्टी की हस्तकला से जुड़े इन परिवारों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

