
टीम अनंत सोच
धनबाद: धनबाद के केंदुआडीह प्रभावित क्षेत्र में भू-धंसान और गैस रिसाव के बढ़ते खतरे के बीच सुरक्षित पुनर्वास की दिशा में बड़ी पहल सामने आई है। राजपूत बस्ती और मुस्लिम बस्ती के 170 विस्थापित परिवार बेलगढ़िया टाउनशिप में शिफ्ट होने के लिए तैयार हो गए हैं। बीसीसीएल और जेआरडीए के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में पुनर्वास पैकेज और आवास को लेकर सहमति बनी है। हालांकि रैयत अब भी उचित मुआवजे और सुरक्षित पुनर्वास की मांग पर कायम हैं।
केंदुआडीह के राजपूत बस्ती में करीब पांच दिन पहले बने बड़े गोप ने इलाके में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जमीन के नीचे लगातार हो रही हलचल, भू-धंसान और गैस रिसाव की आशंका के बीच प्रभावित परिवारों को अब सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित करना जरूरी माना जा रहा है।
इसी को लेकर केंदुआडीह वीटीसी में जेआरडीए और बीसीसीएल अधिकारियों के साथ प्रभावित ग्रामीणों की बैठक हुई। बैठक में पुनर्वास योजना को लेकर सकारात्मक बातचीत हुई और 170 परिवारों ने बेलगड़िया टाउनशिप में शिफ्ट होने पर सहमति जताई।
पुनर्वास पैकेज के तहत प्रत्येक परिवार को बेलगड़िया में दो क्वार्टर दिए जाएंगे। इसके अलावा शिफ्टिंग के दौरान 50 हजार रुपये शिफ्टिंग भत्ता, 50 हजार रुपये किराया भत्ता और 50 हजार रुपये आजीविका सहायता के रूप में तत्काल भुगतान किया जाएगा। इस तरह प्रारंभिक तौर पर डेढ़ लाख रुपये की सहायता मिलेगी। पुनर्वास के छह महीने पूरे होने के बाद एक लाख रुपये की शेष राशि का भुगतान किया जाएगा। यानी प्रत्येक परिवार को कुल ढाई लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी।
बैठक में ग्रामीणों ने बेलगड़िया टाउनशिप में मंदिर, मस्जिद और कब्रिस्तान जैसी धार्मिक और सामाजिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। स्थानीय निवासी दीनानाथ सिंह ने बताया कि अधिकारियों के अनुसार बेलगड़िया में फिलहाल एक मस्जिद मौजूद है। वहीं ग्रामीणों की मांग को देखते हुए अतिरिक्त मंदिर, मस्जिद और कब्रिस्तान के निर्माण पर जेआरडीए की ओर से सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया गया है।
पुनर्वास पैकेज और अधिकारियों के आश्वासन से राजपूत बस्ती और मुस्लिम बस्ती के 170 परिवार संतुष्ट हैं और उन्होंने बेलगड़िया टाउनशिप में शिफ्ट होने पर सहमति जताई है।
हालांकि, इस पूरे मामले में रैयतों की समस्या अब भी बनी हुई है। भू-धंसान और गैस रिसाव के खतरे के बावजूद कई रैयत अपनी पुश्तैनी जमीन और आजीविका को लेकर चिंतित हैं। वे बीसीसीएल के पुनर्वास प्रस्ताव के तहत बेलगड़िया जाने से पहले उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
रैयत शैलेश चंद्र घोष का कहना है कि सरकार की पुनर्वास नीति में रैयत और गैर-रैयत को एक समान मानना उचित नहीं है। रैयतों को उनकी जमीन के बदले उचित मुआवजा और सुरक्षित पुनर्वास मिलना चाहिए। यदि उनकी मांग पूरी होती है, तो वे भी अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए तैयार हैं।
रैयतों के मुआवजे से जुड़े सवाल पर पीबी एरिया के जीएम जयंत के दास ने कहा कि खतरे को देखते हुए बीसीसीएल प्रबंधन लगातार रैयतों से भी बेलगढ़िया शिफ्ट होने का आग्रह कर रहा है। रैयतों के दावों और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही मुआवजे को लेकर प्रबंधन कोई निर्णय लेगा।
उन्होंने बताया कि केंदुआडीह क्षेत्र को काफी पहले ही डेंजर जोन घोषित किया जा चुका है और बीसीसीएल लगातार लोगों से सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील कर रहा है। फिलहाल 170 परिवारों ने बेलगड़िया जाने पर सहमति दे दी है।
केंदुआडीह में लगातार बढ़ते भू-धंसान और गैस रिसाव के खतरे के बीच 170 परिवारों का बेलगढ़िया शिफ्ट होने के लिए तैयार होना बीसीसीएल और प्रशासन के लिए बड़ी राहत है। हालांकि रैयतों के मुआवजे और पुनर्वास का मुद्दा अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है। अब रैयतों के दस्तावेजों की जांच और उचित मुआवजे पर होने वाला फैसला इस पुनर्वास प्रक्रिया की अगली दिशा तय करेगा। प्रभावित लोगों को उम्मीद है कि सुरक्षित पुनर्वास के साथ उनकी सामाजिक और आर्थिक जरूरतों का भी उचित समाधान किया जाएगा।

