
मनीष रंजन की रिपोर्ट
धनबाद: झारखण्ड अभिभावक महासंघ के अध्यक्ष पप्पू सिंह ने निरसा क्षेत्र के विधायक अरूप चटर्जी से शिष्टाचार भेंट कर एक महत्वपूर्ण जनसमस्या को उनके समक्ष रखा। यह मुलाकात औपचारिक नहीं, बल्कि उन हजारों अभिभावकों की आवाज थी, जो निजी विद्यालयों की मनमानी से परेशान हैं।
पप्पू सिंह ने विधायक को बताया कि गैर-सरकारी निजी स्कूलों द्वारा री-एडमिशन (पुनः नामांकन) के नाम पर, अलग-अलग शीर्षकों जैसे एनुअल चार्ज और बिल्डिंग डेवलपमेंट फीस के रूप में भारी शुल्क वसूला जा रहा है। अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाला जा रहा है और कई मामलों में यह शुल्क नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि अभिभावक शुल्क देने में असमर्थ होते हैं, तो बच्चों का नामांकन रद्द करने की धमकी दी जाती है, जिससे परिवारों के सामने गंभीर दुविधा उत्पन्न हो जाती है।
उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि विद्यालयों द्वारा नाम परिवर्तन या नए नाम से संचालन के दौरान भी अभिभावकों से अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है। पप्पू सिंह ने स्पष्ट किया कि यह केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अवसर से जुड़ा विषय है, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के अभिभावक सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। इस दौरान उन्होंने विधायक अरूप चटर्जी से आग्रह किया कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विधानसभा में उठाया जाए। साथ ही जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को निर्देश देने की मांग की, ताकि निजी विद्यालयों की फीस संरचना की जांच हो सके और किसी भी प्रकार की अवैध वसूली पर रोक लगाई जा सके।
विधायक अरूप चटर्जी ने पूरे विषय को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को संबंधित विभागों के समक्ष रखेंगे तथा सदन में भी उठाएंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और इसमें किसी भी प्रकार का शोषण स्वीकार नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आगामी दिनों में अभिभावक महासंघ का एक प्रतिनिधिमंडल धनबाद के छह विधायकों से मिलकर ज्ञापन सौंपेगा। साथ ही निरसा विधायक के नेतृत्व में झारखण्ड के मुख्यमंत्री से भी मुलाकात कर अपनी मांगों को रखा जाएगा।
इस वार्ता के दौरान उदय प्रताप सिंह, प्रवीण गोधा और अविनाश कुमार पाण्डेय सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
