
मनीष रंजन की रिपोर्ट
धनबाद: आज दिनांक 01-04-2026 को झारखंड अभिभावक महासंघ का एक प्रतिनिधिमंडल, अध्यक्ष पप्पू सिंह के नेतृत्व में धनबाद के उप-विकास आयुक्त सन्नी राज को एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में महासंघ ने मांग की कि री-एडमिशन शुल्क को अन्य छद्म नामों जैसे बिल्डिंग चार्ज, डेवलपमेंट चार्ज, एनुअल चार्ज, कॉशन मनी आदि के रूप में वसूले जाने पर तत्काल रोक लगाई जाए।
अध्यक्ष पप्पू सिंह ने कहा कि जिले के निजी स्कूलों द्वारा नियमों के विरुद्ध शुल्क वसूली और शुल्क संरचना की अविलंब जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि री-एडमिशन शुल्क को अलग-अलग नामों से वसूला जा रहा है, जिस पर प्रशासन और सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए। इस पर उप-विकास आयुक्त ने आश्वासन दिया कि सभी मुद्दों पर 7 अप्रैल को अभिभावक महासंघ के साथ बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें शिक्षा विभाग के वरीय पदाधिकारी भी शामिल होंगे।
महासचिव मनोज मिश्रा ने कहा कि निजी स्कूल री-एडमिशन के नाम पर छद्म शुल्क के रूप में भारी रकम वसूल रहे हैं, जिस पर सरकार और प्रशासन को तुरंत रोक लगानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हर साल पाठ्यक्रम में केवल 2-3 अध्याय बदलकर अभिभावकों को पूरी नई किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है, जिसे बंद किया जाना चाहिए।
वरीय उपाध्यक्ष मुकेश पाण्डेय ने चेतावनी दी कि यदि अभिभावकों का शोषण तुरंत बंद नहीं किया गया तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन करने को मजबूर होगा। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों और पुस्तक प्रकाशकों की साठगांठ के कारण अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। किताबों और स्कूल यूनिफॉर्म की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि से अभिभावक परेशान हैं, जिस पर प्रशासन को तुरंत रोक लगानी चाहिए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान मीडिया प्रभारी रतिलाल महतो, कोषाध्यक्ष प्रेम ठाकुर, उदय प्रताप सिंह, दिलीप सिंह, जितेंद्र मलाकार सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।
