टीम अनंत सोच 

धनबाद: धनबाद पहुंचे झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्यसभा चुनाव, कांग्रेस संगठन और भाषा नियमावली को लेकर अपनी बात रखी। सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने भाजपा पर राज्यसभा चुनाव में खरीद-फरोख्त की राजनीति करने का आरोप लगाया। वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के साथ किसी भी व्यक्तिगत विवाद से इनकार किया। भाषा नियमावली को लेकर उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रीय भाषाओं को सम्मान मिलना चाहिए और सरकार को नियमावली में आवश्यक संशोधन करना चाहिए।

राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड की राजनीति गरमा गई है। धनबाद पहुंचे वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के पास राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं है, इसके बावजूद उम्मीदवार उतारने की तैयारी इस बात का संकेत है कि भाजपा खरीद-फरोख्त की राजनीति करना चाहती है। उन्होंने कहा कि इंडी महागठबंधन के पास झामुमो, कांग्रेस, राजद और वाम दलों समेत कुल 56 विधायकों का समर्थन है। ऐसे में दोनों सीटों पर महागठबंधन की स्थिति मजबूत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतारेगी, हालांकि अंतिम निर्णय पार्टी आलाकमान करेगा।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के साथ कथित मतभेदों को लेकर पूछे गए सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि उनका किसी व्यक्ति विशेष से कोई विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके मतभेद केवल पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों को लेकर हैं, न कि किसी नेता के साथ व्यक्तिगत स्तर पर।

भाषा नियमावली को लेकर चल रही बहस पर भी वित्त मंत्री ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इसे विवाद कहना उचित नहीं होगा, बल्कि यह एक चूक है जिसे सुधारने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस विषय पर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जिसकी बैठक तीन जून को प्रस्तावित है।

राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि बिहार से सटे झारखंड के कई जिलों में भोजपुरी, मैथिली और अंगिका जैसी भाषाएं व्यापक रूप से बोली जाती हैं। इसलिए इन भाषाओं को भी नियमावली में उचित स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनजातीय भाषाओं का सम्मान सभी करते हैं, लेकिन जिन क्षेत्रों में जनजातीय भाषाएं न बोली जाती हों, न पढ़ाई जाती हों और न ही उनके शिक्षक उपलब्ध हों, वहां उन्हें अनिवार्य करना व्यावहारिक नहीं है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि भाषा नियमावली में सभी क्षेत्रीय भाषाओं को समुचित सम्मान और स्थान दिया जाए ताकि किसी भी वर्ग के विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित न हो।

राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा पर लगाए गए आरोप, कांग्रेस संगठन को लेकर दी गई सफाई और भाषा नियमावली में संशोधन की मांग के साथ वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के बयान ने झारखंड की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। अब सभी की नजर तीन जून को होने वाली समिति की बैठक और राज्यसभा चुनाव की आगे की रणनीति पर टिकी हुई है।

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