साहित्यकार बिनोद घोषाल ने किया पत्रिका के पहले अंक का लोकार्पण, बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

टीम अनंत सोच

धनबाद: बांग्ला भाषा, साहित्य और संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में लिंडसे क्लब एंड लाइब्रेरी ने एक अनूठी पहल की है। बांग्ला भाषा सीख रहे बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को मंच देने के उद्देश्य से क्लब की ओर से बच्चों द्वारा तैयार छमाही पत्रिका ‘समुद्दुर’ के पहले अंक का लोकार्पण किया गया।

बांग्ला साहित्यकार सुकुमार राय की 140वीं जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और बाल प्रतिभा का सुंदर संगम देखने को मिला।कार्यक्रम की शुरुआत साहित्यकार सुकुमार राय की तस्वीर पर माल्यार्पण और सामूहिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई।

इसके बाद कोलकाता से पहुंचे युवा साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार बिनोद घोषाल सहित अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से ‘समुद्दुर’ पत्रिका का विमोचन किया।

इस अवसर पर रेडियो जॉकी तन्मय राय चौधरी, डॉ. सिद्धार्थ बंदोपाध्याय, क्लब के अध्यक्ष अमलेंदु सिंहा, सचिव सलिल विश्वास, पत्रिका के संपादक चंदन सरकार, उपसंपादक श्रेया चटर्जी एवं विकास कांति खा उपस्थित थे।

कार्यक्रम का खास आकर्षण कोलकाता से आए रेडियो जॉकी तन्मय राय चौधरी का मनोरंजक कार्यक्रम ‘शब्द बाजी’ रहा। धनबाद में पहली बार आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर बच्चों और उपस्थित लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। वहीं, बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ कविता पाठ कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उनकी प्रस्तुतियों ने अतिथियों और दर्शकों का मन मोह लिया।

पत्रिका के संपादक चंदन सरकार ने बताया कि ‘समुद्दुर’ बच्चों द्वारा, बच्चों के लिए तैयार की गई छमाही बांग्ला पत्रिका है। इसका उद्देश्य बच्चों को अपनी मातृभाषा में लिखने-पढ़ने के लिए प्रेरित करना और उनकी रचनात्मक अभिव्यक्ति को उचित मंच प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि लिंडसे क्लब की ओर से प्रत्येक रविवार को बच्चों के लिए निःशुल्क बांग्ला भाषा की कक्षाएं ‘आबोल ताबोल’ संचालित की जाती हैं। इसी पहल के परिणामस्वरूप बच्चों की रचनाओं को संकलित कर पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया गया है।‘आबोल ताबोल’ के संचालन में मनोज मजूमदार, विकास कांति खा, दीपांकर बाराट, आशीष भट्टाचार्य सहित क्लब के अन्य सदस्य सहयोग करते हैं और बच्चों को बांग्ला भाषा की शिक्षा देते हैं।

मुख्य अतिथि बिनोद घोषाल ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि उनकी बांग्ला भाषा में प्रस्तुतियां देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगा कि वह धनबाद में कोई कार्यक्रम देख रहे हैं। बच्चों की प्रतिभा बंगाल के बच्चों से किसी भी मायने में कम नहीं है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर वह स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।

क्लब के अध्यक्ष अमलेंदु सिंहा और सचिव सलिल विश्वास ने संयुक्त रूप से सभी अतिथियों, अभिभावकों एवं उपस्थित लोगों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को बांग्ला भाषा से जोड़ना, बच्चों में पढ़ने-लिखने की आदत विकसित करना और बांग्ला साहित्य एवं संस्कृति की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाना है। मातृभाषा का संरक्षण केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे बच्चों के दैनिक जीवन और रचनात्मक गतिविधियों का हिस्सा बनाना भी जरूरी है।

कार्यक्रम का मंच संचालन विकास कांति खा एवं श्रेया चटर्जी ने किया। मौके पर क्लब के पदाधिकारी, सदस्य, साहित्यप्रेमी, अभिभावक और बड़ी संख्या में बच्चे मौजूद थे।

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